लक्ष्मी पूजा

आज के समय में लोग सबसे पहले माता लक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त करना चाहते हैं, क्योंकि धन का महत्व अब बेहद बढ़ गया है। केवल घर चलाने के लिए नहीं, बल्कि समाज में मान-सम्मान भी अब धन के आधार पर मिलने लगा है। यह स्थिति केवल हमारे देश की ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की है, इसलिए जिस देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होती है, उसे वही ताकतवर माना जाता है।

दूसरी ओर, कई लोग खूब मेहनत करते हैं, फिर भी उन्हें अपनी मेहनत का पूरा फल नहीं मिल पाता। ऐसे में हिंदू धर्म में धन और समृद्धि की देवी लक्ष्मी की पूजा करने की परंपरा है। हिंदुओं में सप्ताह के दिनों को अलग-अलग देवताओं को समर्पित किया गया है। शुक्रवार का दिन खासतौर पर माता लक्ष्मी की उपासना के लिए माना जाता है। इस दिन लोग माता लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए पूजा, हवन, अनुष्ठान, श्रीसूक्त, कनकधारा स्तोत्र का पाठ और अन्य धार्मिक क्रियाएं करते हैं।

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मैं पंडित श्याम गुरु, माँ बगलामुखी का उपासक हूँ। सर्व सिद्ध पीठ माँ बगलामुखी मंदिर, नलखेड़ा, जिला आगर मालवा (मध्य प्रदेश) में पिछले 10 वर्षों से हवन, पूजन, यज्ञ एवं अनुष्ठान जैसी पूजा-पाठ की सेवाएँ करता आ रहा हूँ। बचपन से ही माँ बगलामुखी के प्रति मेरी गहरी आस्था रही है। माँ की कृपा से भगवती बगलामुखी माई के मंदिर में हवन, पूजन और अनुष्ठान करने का सौभाग्य मुझे प्राप्त हुआ है।

पंडित श्याम गुरु

बगलामुखी मंदिर, नलखेड़ा

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