स्वर्ण ओर रजत श्रृंगार

माँ बगलामुखी के अनेक स्वरूप वर्णित किए गए हैं। मान्यता है कि देवी माँ बगलामुखी समुद्र के मध्य स्थित मणिमय द्वीप पर बहुमूल्य रत्नों से अलंकृत सिंहासन पर विराजमान रहती हैं। वे त्रिनेत्री स्वरूप वाली हैं, जिनके मस्तक पर अर्धचंद्र शोभायमान है और उनका देहवर्ण पीला है। देवी पीले वस्त्र धारण करती हैं तथा पीले पुष्पों की माला पहनती हैं, वहीं उनके अन्य आभूषण भी पीतवर्ण और रत्नजटित होते हैं।

माँ विशेष रूप से चंपा पुष्प, हल्दी की गांठ जैसे पीले तत्वों की माला धारण करती हैं। वे रत्नों से सुसज्जित रथ पर आरूढ़ होकर शत्रुओं का विनाश करती हैं और उन्हें पीले रंग की वस्तुएँ अत्यंत प्रिय हैं।

इसी कारण माँ बगलामुखी का शृंगार स्वर्ण एवं रजत से किया जाता है। नवरात्रि, माँ बगलामुखी जयंती, राष्ट्रीय पर्वों तथा अन्य विशेष अवसरों पर माँ को त्रिवर्णीय चुनरी अर्पित कर भव्य रूप से सजाया जाता है। इन विशेष अवसरों पर माँ का दिव्य और आकर्षक शृंगार किया जाता है।

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मैं पंडित श्याम गुरु, माँ बगलामुखी का उपासक हूँ। सर्व सिद्ध पीठ माँ बगलामुखी मंदिर, नलखेड़ा, जिला आगर मालवा (मध्य प्रदेश) में पिछले 10 वर्षों से हवन, पूजन, यज्ञ एवं अनुष्ठान जैसी पूजा-पाठ की सेवाएँ करता आ रहा हूँ। बचपन से ही माँ बगलामुखी के प्रति मेरी गहरी आस्था रही है। माँ की कृपा से भगवती बगलामुखी माई के मंदिर में हवन, पूजन और अनुष्ठान करने का सौभाग्य मुझे प्राप्त हुआ है।

पंडित श्याम गुरु

बगलामुखी मंदिर, नलखेड़ा

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