आकर्षण पूजा

जब हम किसी व्यक्ति या वस्तु को उसके रूप, रंग अथवा बाहरी आकर्षण के कारण पसंद करने लगते हैं और उसे प्राप्त करने की इच्छा करते हैं, तो इसे आकर्षण कहा जाता है। माना जाता है कि मन में उत्पन्न होने वाले सकारात्मक या नकारात्मक विचार, उसी प्रकार के अनुभवों को हमारे जीवन में खींच लाते हैं। यह मान्यता इस विश्वास पर आधारित है कि प्रत्येक व्यक्ति और उसके विचार ऊर्जा से बने होते हैं तथा ऊर्जा एक-दूसरे को आकर्षित करती है। इसी प्रक्रिया के माध्यम से व्यक्ति अपने स्वास्थ्य, धन और संबंधों में सुधार कर सकता है।

हालाँकि आकर्षण के नियम का कोई ठोस वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है और अधिकांश वैज्ञानिक इसे छद्म-विज्ञान की श्रेणी में रखते हैं। कई शोधकर्ताओं का मत है कि इसके समर्थक लोग वैज्ञानिक सिद्धांतों का गलत उपयोग करते हैं। इसी कारण इसे समझना सरल नहीं होता और इसे जीवन का एक रहस्यमय हिस्सा माना जाता है। फिर भी, जो व्यक्ति इसके सिद्धांत को समझ लेता है, उसे जीवन में बड़ी सफलता प्राप्त होती है।

हम प्रायः यह अनुभव करते हैं कि जब हम किसी विषय या कार्य के बारे में निरंतर सोचते हैं या उसमें गहरी रुचि लेते हैं, तो एक अदृश्य चुंबकीय शक्ति हमें उसकी ओर खींचने लगती है। यही आकर्षण का सिद्धांत है। इसके अनुसार, नकारात्मक सोच और कर्म नकारात्मक परिणाम देते हैं, जबकि सकारात्मक विचार और अच्छे कर्म जीवन में सकारात्मक परिणाम और सुखद अनुभव प्रदान करते हैं।

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मैं पंडित श्याम गुरु, माँ बगलामुखी का उपासक हूँ। सर्व सिद्ध पीठ माँ बगलामुखी मंदिर, नलखेड़ा, जिला आगर मालवा (मध्य प्रदेश) में पिछले 10 वर्षों से हवन, पूजन, यज्ञ एवं अनुष्ठान जैसी पूजा-पाठ की सेवाएँ करता आ रहा हूँ। बचपन से ही माँ बगलामुखी के प्रति मेरी गहरी आस्था रही है। माँ की कृपा से भगवती बगलामुखी माई के मंदिर में हवन, पूजन और अनुष्ठान करने का सौभाग्य मुझे प्राप्त हुआ है।

पंडित श्याम गुरु

बगलामुखी मंदिर, नलखेड़ा

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