उच्चाटन पूजा

तांत्रिक षट्कर्म साधनाओं में उच्चाटन प्रयोग को विशेष रूप से प्रभावशाली माना गया है। इसके माध्यम से व्यक्ति के मन में उत्पन्न नकारात्मक भाव, गलत संगति अथवा अनुचित आकर्षण को हटाकर उसे सही मार्ग की ओर अग्रसर किया जाता है। यह प्रयोग शत्रुओं के प्रति अरुचि उत्पन्न करता है और मन को शुभ एवं सकारात्मक कार्यों की ओर प्रेरित करता है।

यह साधना उन व्यक्तियों के लिए अत्यंत लाभकारी होती है जो दूसरों के प्रभाव में आकर अपने उचित मार्ग से भटक जाते हैं, बुरी आदतों या गलत संगत में फँस जाते हैं अथवा पारिवारिक और सामाजिक मर्यादाओं की उपेक्षा कर जीवन में अशांति उत्पन्न कर लेते हैं। पति-पत्नी के संबंधों में किसी तीसरे व्यक्ति के कारण आई दरार, परिवार की प्रतिष्ठा पर आए संकट या अनावश्यक धन व्यय जैसी समस्याओं का समाधान भी इस प्रयोग द्वारा किया जा सकता है।

जन्मकुंडली में अशुभ ग्रहों के प्रभाव से उत्पन्न मानसिक तनाव, पारिवारिक कलह और आर्थिक कठिनाइयों को दूर करने में भी उच्चाटन साधना प्रभावी मानी जाती है। यह व्यक्ति को गलत संबंधों और अनैतिक आकर्षण से विरक्त कर पुनः सही दिशा में आगे बढ़ने में सहायक होती है।

उच्चाटन प्रयोग का प्रभाव अत्यंत प्रभावशाली बताया गया है, जिसके द्वारा न केवल दरिद्रता और अशांति को समाप्त किया जा सकता है, बल्कि धन-संपत्ति पर अनुचित अधिकार जमाने वालों से भी मुक्ति मिल सकती है। इस साधना के पश्चात व्यक्ति अनुचित मोह से मुक्त होकर जीवन में संतुलन, शांति और सम्मान की अनुभूति करता है।

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मैं पंडित श्याम गुरु, माँ बगलामुखी का उपासक हूँ। सर्व सिद्ध पीठ माँ बगलामुखी मंदिर, नलखेड़ा, जिला आगर मालवा (मध्य प्रदेश) में पिछले 10 वर्षों से हवन, पूजन, यज्ञ एवं अनुष्ठान जैसी पूजा-पाठ की सेवाएँ करता आ रहा हूँ। बचपन से ही माँ बगलामुखी के प्रति मेरी गहरी आस्था रही है। माँ की कृपा से भगवती बगलामुखी माई के मंदिर में हवन, पूजन और अनुष्ठान करने का सौभाग्य मुझे प्राप्त हुआ है।

पंडित श्याम गुरु

बगलामुखी मंदिर, नलखेड़ा

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