तंत्र पूजा

माँ बगलामुखी के तंत्र-मंत्र और उनकी अद्भुत शक्ति को समझने से पूर्व तंत्र के वास्तविक भाव को जानना आवश्यक होता है। शास्त्रों में “तंत्र” शब्द का बार-बार उल्लेख मिलता है, जिसका आशय है किसी भी कार्य को सुव्यवस्थित और योजनाबद्ध तरीके से संपन्न करना। तंत्र साधना के माध्यम से ऐसे कार्य भी संभव हो जाते हैं, जो सामान्यतः असंभव प्रतीत होते हैं।

माँ बगलामुखी महाविद्या के तीन प्रमुख उपासक माने गए हैं—सृष्टि के रचयिता भगवान ब्रह्मा, पालनकर्ता भगवान विष्णु तथा भगवान परशुराम। इनके अतिरिक्त सनक, नंदन, सनातन, सनत कुमार, देवर्षि नारद, सांख्यायन, परमहंस, द्रोणाचार्य, युधिष्ठिर, राजा नल, लंकापति रावण और विश्वामित्र जैसे अनेक महान पुरुष भी माँ बगलामुखी के श्रेष्ठ उपासक रहे हैं।

आगे चलकर स्वामी शिव हरि बाबा, स्वामी विशुद्धानंद एवं श्री स्वामी जी महाराज ने माँ बगलामुखी और धूमावती तंत्र को सिद्ध कर असंख्य भक्तों का कल्याण किया। शास्त्रों में वर्णन मिलता है कि माँ बगलामुखी तंत्र की शक्ति इतनी प्रभावशाली है कि वह विधाता द्वारा निर्धारित कार्यों में भी परिवर्तन करने में सक्षम है।

तंत्र साधना वास्तव में प्रकृति और ब्रह्मांड के साथ गहन संबंध स्थापित करने का एक श्रेष्ठ माध्यम है, जिसके द्वारा साधक आत्मिक बल, दिव्य ज्ञान और जीवन की अनेक जटिल समस्याओं से मुक्ति प्राप्त करता है।

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मैं पंडित श्याम गुरु, माँ बगलामुखी का उपासक हूँ। सर्व सिद्ध पीठ माँ बगलामुखी मंदिर, नलखेड़ा, जिला आगर मालवा (मध्य प्रदेश) में पिछले 10 वर्षों से हवन, पूजन, यज्ञ एवं अनुष्ठान जैसी पूजा-पाठ की सेवाएँ करता आ रहा हूँ। बचपन से ही माँ बगलामुखी के प्रति मेरी गहरी आस्था रही है। माँ की कृपा से भगवती बगलामुखी माई के मंदिर में हवन, पूजन और अनुष्ठान करने का सौभाग्य मुझे प्राप्त हुआ है।

पंडित श्याम गुरु

बगलामुखी मंदिर, नलखेड़ा

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