विद्वेषण पूजा

तंत्र-मंत्र के छह प्रकार के कर्मों में विद्वेषण भी एक माना जाता है। जहाँ सम्मोहन का उद्देश्य दो व्यक्तियों के बीच आकर्षण उत्पन्न करना होता है, वहीं विद्वेषण तंत्र का प्रयोजन निकट संबंध रखने वाले लोगों के बीच विरोध या दूरी पैदा करना होता है। अक्सर देखा जाता है कि दो व्यक्तियों के संबंध सामान्य रूप से चल रहे होते हैं, लेकिन अचानक उनके बीच मतभेद और दरार उत्पन्न हो जाती है।

विद्वेषण तंत्र के प्रभाव से दोनों व्यक्तियों के मन में नकारात्मक विचार या द्वेष की भावना उत्पन्न हो जाती है, जिससे आपसी मनमुटाव बढ़ने लगता है। सामान्यतः इसका प्रयोग वे लोग करते हैं जो दूसरों की खुशहाली सहन नहीं कर पाते या फिर दोनों में से किसी एक को अपने पक्ष में करना चाहते हैं।

प्राचीन काल में इस प्रभावशाली विद्वेषण तंत्र का उपयोग केवल किसी व्यक्ति को गलत संगत से दूर रखने या उसकी सुरक्षा के उद्देश्य से किया जाता था। किंतु वर्तमान समय में इसका दुरुपयोग बढ़ गया है और लोग इसे दूसरों के सुख-शांतिपूर्ण जीवन को प्रभावित करने के लिए प्रयोग करने लगे हैं।

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मैं पंडित श्याम गुरु, माँ बगलामुखी का उपासक हूँ। सर्व सिद्ध पीठ माँ बगलामुखी मंदिर, नलखेड़ा, जिला आगर मालवा (मध्य प्रदेश) में पिछले 10 वर्षों से हवन, पूजन, यज्ञ एवं अनुष्ठान जैसी पूजा-पाठ की सेवाएँ करता आ रहा हूँ। बचपन से ही माँ बगलामुखी के प्रति मेरी गहरी आस्था रही है। माँ की कृपा से भगवती बगलामुखी माई के मंदिर में हवन, पूजन और अनुष्ठान करने का सौभाग्य मुझे प्राप्त हुआ है।

पंडित श्याम गुरु

बगलामुखी मंदिर, नलखेड़ा

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