शत्रु नाशक पूजा
माता बगलामुखी को शक्ति और विजय की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है। उनकी साधना विशेष रूप से युद्ध में सफलता प्राप्त करने और शत्रुओं के विनाश के लिए की जाती है। ऐसी मान्यता है कि महाभारत युद्ध से पूर्व नलखेड़ा में भगवान श्रीकृष्ण और अर्जुन ने भी माता बगलामुखी की आराधना की थी।
माता बगलामुखी की उपासना से शत्रुओं का भय समाप्त होता है और साधक को वाणी की सिद्धि एवं प्रभाव प्राप्त होता है। भक्तों का विश्वास है कि माता की कृपा से सभी प्रकार की बाधाएँ दूर हो जाती हैं और शत्रु पराजित होते हैं। देवी की पूजा धन-समृद्धि, मानसिक शांति तथा वाद-विवाद में विजय प्राप्ति के लिए भी की जाती है।
माता बगलामुखी के उपासक को भोग और मोक्ष—दोनों की प्राप्ति होती है। देवी की अनुकंपा से भक्त की वाणी प्रभावशाली, शुद्ध और मंगलकारी बनती है, जिससे वह वाणी दोषों से मुक्त रहता है। माता अपने भक्तों को ऐसा आशीर्वाद प्रदान करती हैं कि वे जीवन की प्रत्येक कठिनाई पर विजय प्राप्त कर सकें।
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मैं पंडित श्याम गुरु, माँ बगलामुखी का उपासक हूँ। सर्व सिद्ध पीठ माँ बगलामुखी मंदिर, नलखेड़ा, जिला आगर मालवा (मध्य प्रदेश) में पिछले 10 वर्षों से हवन, पूजन, यज्ञ एवं अनुष्ठान जैसी पूजा-पाठ की सेवाएँ करता आ रहा हूँ। बचपन से ही माँ बगलामुखी के प्रति मेरी गहरी आस्था रही है। माँ की कृपा से भगवती बगलामुखी माई के मंदिर में हवन, पूजन और अनुष्ठान करने का सौभाग्य मुझे प्राप्त हुआ है।
पंडित श्याम गुरु
बगलामुखी मंदिर, नलखेड़ा